Sunday, 6 July 2014

बिल्ली के बच्चें कि साहस भरी कहानी, तस्वीरों कि जुबानी

हाल ही में जब जर्मन फोटोग्राफर क्लॉडिया होफ (Claudia Hopf), साउथ अफ्रीका के बोस्तवाना स्थित कगलागड़ी ट्रांसफ्रंटियर पार्क (Kgalagadi Transfrontier Park) में घूम रहे थे तो उन्होंने एक हैरान कर देने वाला नज़ारा देखा।  6 अफ्रीकी शेरनियों के  झुण्ड ने खुद से 30 गुना छोटे एक बिल्ली के बच्चे को घेर रखा था और वे उस पर हमला करने की कोशिश कर रही थी। लेकिन बहादुर बच्चे ने जान बचाने के लिए शेरनियों को डराने की भरसक कोशिश की।
इस जद्दोजहद में उसने एक शेरनी के मुंह पर अपना पंजा भी मारा, लेकिन उनके सामने वह ज्यादा देर टिक नहीं पाया। कुछ देर बाद भूखी शेरनियों ने उसे मार डाला।
इस सारे घटना क्रम को क्लॉडिया होफ ने अपने केमरे में कैद किया। ये तस्वीरें बिल्ली के बच्चे के अदभुत साहस को दिखती है तथा इस कहावत को चरिथारत करती है कि साहस शारीर कि आकर से नहीं बल्कि दिल से आता है। क्लॉडिया होफ ने इस पुरे घटनाक्रम को 11 तस्वीरें में कैद किया तो आप सब भी देखिये बिल्ली के बच्चें कि साहस भरी कहानी, 11 तस्वीरों कि जुबानी -














अजब गजब ए. टी. म. जिसमे पैसों कि जगह निकलते है केक्स

क्या आपने कभी ऐसी ए. टी. म. मशीन के बारे में सुना है जिसमे से पैसों कि जगह खाने कि चीज़े निकले, शायद नहीं लेकिन हाल ही में न्यूयॉर्क में कप केक्स बनाने वाली कम्पनी स्प्रिंकल्स ने केक्स प्रेमियों कि जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसी ए. टी. म. मशीने लगाईं है जिनसे कि पैसों कि जगह कप केक्स निकलते है। यह ए. टी. म. 24 घंटे काम करता है। इस ए. टी. म. मशीन से आप अपने क्रेडिट कार्ड के द्वारा अपना मनचाहा केक पा सकते है।


इस ए. टी. म. में एक बार में 760 केक आते है।  लोगो को हमेशा ताज़ा केक मिले इसलिए इसे दिन में 3 बार भरा जाता है।  हर कप केक कि कीमत 4. 25 $ है।  इस मशीन में लगभग 20 वैरायटी के केक्स उपलब्ध रहते है।  ग्राहक को पहले अपना मनपसंद फलेवर चुनना पड़ता है, फिर क्रेडिट कार्ड को स्वाइप करके भुगतान करना पड़ता है, भुगतान कि प्रक्रिया पूर्ण होते ही ए. टी. म. मशीन के बीच में बनी विंडो में केक्स आ जाते है।


कैसे आया विचार :-
स्प्रिंकल्स केक्स के मालिक नेल्सन को केक्स ए. टी. म. बनाने का विचार आज से 6 साल पहले तब आया जब एक रात उनकी गर्भवती पत्नी ने कप केक्स खाने कि इच्छा ज़ाहिर कि। नेल्सन कि खुद कि कप केक्स कि बेकरी थी पर वो आधी रात को कप केक्स का इंतज़ाम न कर सके। तब उन्होंने केक्स ए. टी. म. बनाने के बारे में सोचा जो 24 घंटे काम करे और 6 साल बाद उन्होंने अपने इस सपने को हकीकत में बदल दिया।


PL-01 , टैंक जो बटन दबाते ही हो जायेगा गायब

पोलैंड कि शस्त्र निर्माता कंपनी ओब्रुम (OBRUM) ने ब्रिटेन कि कंपनी बी. ए. ई. सिस्टम्स (BAE Systems) के साथ मिलकर एक ख़ास टैंक तैयार किया है।  इसकी  सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बटन दबाते ही युद्ध के मैदान से गायब हो जाएगा।  इस टैंक का नाम PL-01 है और इसे फ्यूचर टैंक कहा जा रहा है। कम्पनी ने 2 सितम्बर 2013 को इंटरनेशनल डिफेन्स इंडस्ट्री प्रदर्शनी में इसे दुनिया के सामने प्रथम बार पेश किया।


PL-01 कि विशेषताए (Specifications of PL-01) :-
1. इस टैंक का वजन 35 टन है।
2. इसमें तीन लोग बैठ सकते है।
3. इसकी लम्बाई 7 मीटर, ऊँचाई 2.8 मीटर और चौड़ाई 3. 8 मीटर है।
4. इसके डीज़ल इंजन कि क्षमता 940 हॉर्स पॉवर है।
5. इस टैंक कि अधिकतम स्पीड प्लेन सरफेस पर 70 kph और रफ़ सरफेस पर 50 kph है।
6. PL-01 टैंक का मुख्य हथियार 105 mm या 120 mm कि केलिबर गन है। इसके अलावा इसमें 7.62 mm कि मशीन गन भी है।


7. इस टैंक में फाइटर प्लेन कि तरह DAS (distributed aperture system) भी लगा है। इस सिस्टम कि मदद से रात हो या दिन, टैंक के अंदर से बाहर कि साड़ी गतिविधि देखि जा सकती है। 
8. इस टैंक में हथियार कि लोडिंग ऑटोमेटिक है।
9. PL-01 कि सबसे बड़ी विशेषता इस टैंक के चारो और लगी एक विशेष प्रकार कि प्लेट्स है।  ये टैंक का तापमान नियंत्रित करती हैं। यदि इसके चारो ओर के वातावरण के स्तर को नियंत्रित किया जाता है, तो यह टैंक हीट इमेंजिंग सेंसर से गायब हो जाता है।  सेंसर को एडजस्ट करने पर यह कार जैसा नजर आने लगता है।



अभी यह टैंक परिक्षण के दौर में है।  कंपनी का कहना है कि वे 2016 तक इसका फुल प्रोटोटाइप तैयार कर लेंगे और 2018 तक इसका उत्पादन शुरू हो जाएगा। टैंक के फ्यूचर वर्जन में वीडियो या लाइट रिसीवर होंगे। इससे टैंक वातावरण के अनुकूल अपने रूप बदल सकेगा।

PL-01 टैंक का  विडियो 


शनिवार वाडा फोर्ट - इंडिया के टॉप हॉन्टेड प्लेस में है शामिल (Shaniwar wada fort - one of the most haunted place of India)

पढ़िए कुम्भलगढ़ फोर्ट के बारे में जिसकी दीवार है विशव की दूसरी सबसे बड़ी दीवार Link
शनिवार वाडा फोर्ट, महाराष्ट्र के पुणे में स्तिथ है। इस किले की नीव शनिवार के दिन रखी गई थी इसलिए इसका नाम शनिवार वाडा पड़ा। यह फोर्ट अपनी भव्यता और ऐतिहासिकता के लिए प्रसिद्ध है।  इसका निर्माण 18 वि शताब्दी में  मराठा साम्राज्य पर शासन करने वाले पेशवाओं ने करवाया था। यह किला 1818 तक पेशवाओं की प्रमुख गद्दी रहा था।  लेकिन इस किले के साथ एक काला अध्याय भी जुड़ा है। इस किले में 30 अगस्त 1773 की रात को 18 साल के  नारायण राव, जो की मात्र 16 साल की उम्र में मराठा साम्राज्य के पांचवे पेशवा बन थे, की षड्यंत्रपूर्वक ह्त्या कर दी गई थी। जब हत्यारे उसकी ह्त्या करने आये तो उसने ख़तरा भांप कर अपने काका (चाचा)  कक्ष की और "Kaka Mall Vachva" (Uncle Save Me) कहते हुए दौड़ लगाई पर बदकिस्मती  वहाँ पहुंचने से पहले मारा गया।  कहते है की किले में उसी बच्चे नारायण राव की आत्मा आज भी भटकती है और उसके द्वारा बोले गए आखिरी शब्द "काका माला वचाव" आज भी किले में सुनाई देते है। इसलिए इस किले को इंडिया के टॉप मोस्ट हॉन्टेड प्लेस  (Top most haunted place of India) में शामिल किया जाता है। आइये अब हम आपको इस किले के निर्माण से लेकर इस पर अंग्रेजो के अधिकार तक तथा नारायण राव की षड्यंत्रपूर्वक ह्त्या पर विस्तार से बताते है।



Shaniwar wada fort     Image credit TripAdvisor 

शनिवार वाडा फोर्ट का निर्माण :
इस किले की नींव पेशवा बाजीराव प्रथम ने 10 जनवरी 1730, शनिवार को रखी थी। इस किले का उदघाटन 22 जनवरी 1732 को किया गया था। हालांकि इसके बाद भी किले के अंदर कई इमारते और एक लोटस फाउंटेन का निर्माण हुआ था। शनिवार वाडा फोर्ट का निर्माण राजस्थान के ठेकेदारो ने किया था जिन्हे की काम पूर्ण होने के बाद पेशवा ने नाईक (Naik) की उपाधि से नवाज़ा था। इस किले में लगी टीक की लकड़ी जुन्नार (Junnar) के  जंगलो से, पत्थर चिंचवाड़ (Chinchwad) की खदानों से तथा चुना जेजुरी (Jejuri) की खदानों से लाया गया था। इस महल में 27 फ़रवरी 1828 को अज्ञात कारणों से भयंकर आग लगी थी।  आग को पूरी तरह बुझाने में सात दिन लग गए थे। इस से किले परिसर में बनी कई इमारते पूरी तरह नष्ट हो गई थी। उनके अब केवल अवशेष बचे है।  अब यदि हम इस किले की संरचना की बात करे तो किले में प्रवेश करने के लिए पांच दरवाज़े है।


Interiors of   Shaniwarwada         Image Credit Wikipedia

1 . दिल्ली दरवाज़ा  Dilli Darwaza (Delhi Gate) :
यह इस किले का सबसे प्रमुख गेट है जो  उत्तर दिशा  दिल्ली  तरफ खुलता है इसलिए इसे दिल्ली दरवाज़ा कहते है। यह इतना ऊँचा और चौड़ा की है पालकी सहित हाथी आराम से आ जा सकते है। हमले के वक़्त हाथियों से इस गेट को बचाने लिए इस गेट के दोनों पलड़ो में 12 इंच लम्बे 72 नुकीले कीले लगे हुए है जो कि हाथी के माथे तक की ऊँचाई पर है। दरवाज़े के दाहिने पलड़े में एक छोटा सा गेट और है जो की सैनिको के आने जाने के काम आता था।


Shaniwar Wada palace's Delhi Gate          Image Credit Wikipedia

2. मस्तानी दरवाज़ा  Mastani Darwaja (Mastani's Gate) or Aliibahadur Darwaja  :
यह दरवाज़ा दक्षिण दिशा की और खुलता है। बाजीराव  की पत्नी मस्तानी जब किले से बाहर जाती तो इस दरवाज़े का उपयोग करती थी।  इसलिए इसका नाम मस्तानी दरवाज़ा है। वैसे इसका एक और नाम अली बहादुर दरवाज़ा भी है।
3. खिड़की दरवाज़ा  Khidki Darwaja (Window Gate) :
यह दरवाज़ा पूर्व दिशा में खुलता है। इस दरवाज़े में खिड़की बनी हुई है इसलिए इसे खिड़की दरवाज़ा कहते है।

4. गणेश दरवाज़ा Ganesh Darwaja (Ganesh Gate) :
यह दरवाज़ा दक्षिण - पूर्व दिशा में खुलता है।  यह दरवाज़ा किला परिसर में स्थित गणेश रंग महल के पास स्थित है इसलिए इसे गणेश दरवाज़ा कहते है।
5. जंभूल दरवाज़ा या नारायण दरवाज़ा Jambhul Darwaja or Narayan Darwaja (Narayan's Gate) :
ये दरवाज़ा दक्षिण दिशा में खुलता है। ये दरवाज़ा मुख्यतः दासियों के महल आने जाने के काम आता था। नारायण राव पेशवा की ह्त्या के बाद उसकी लाश के टुकड़ो को इसी रास्ते से किले के बाहर ले जाया गया था इसलिए इसे नारायण दरवाज़ा भी कहा जाता है।


Shaniwar Wada palace Narayan's Gate           Image Credit Wikipedia

अब यदि किले के अंदर की इमारतों की बात करे तो इस किले में मुख्यतः तीन महल थे और तीनो ही 1828 में लगी आग में नष्ट हो गए। अब केवल उनके अवशेष है। इसके अलावा किले में एक 7 मंजिला ऊंची इमारत भी थी जिसकी सबसे ऊंची चोटी से 17 किलो मीटर दूर, आलंदी में स्थ्ति संत ज्ञानेश्वर के मंदिर का शिखर दिखाई देता था। यह इमारत भी आग में नष्ट हो गई थी। अब किले में कुछ छोटी इमारते ही सही सलामत है।


Shaniwar Wada palace walls and ruins below     Image Credit Wikipedia

लोटस फाउंटेन (Lotus Fountain) :
इस किले मुख्य आकर्षण कमल की आकार का एक फाउंटेन (फव्वारा) है। जिसे की हज़ारी करंजे कहते है। लेकिन इस फाउंटेन से भी एक दुखद इतिहास जुड़ा है। इसमें गिरकर घायल होने से एक राजकुमार की मृत्यु हो गई थी। 


Shaniwar Wada palace Lotus fountain      Image Credit Wikipedia   

जुन 1818 में पेशवा बाजीराव द्वितीय ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सर जॉन मैलकम को यह गद्दी सौप दी और इस तरह पेशवाओ की शान रहे इस किले पर अंग्रेजो का अधिकार हो गया।

नारायण राव की हत्या :
पेशवा नाना साहेब के तीन पुत्र थे विशव राव, महादेव राव और नारायण राव।  सबसे बड़े पुत्र विशव राव पानीपत की तीसरी लड़ाई में मारे गए थे। नाना साहेब की मृत्यु के उपरान्त महादेव राव को गद्दी पर बैठाया गया। पानीपत की तीसरी  लड़ाई में महादेव राव पर ही रणनीति बनाने की पूरी जिम्मेदारी थी लेकिन उनकी बनाई हुई कुछ रणनीतियां बुरी तरह विफल रही थी फलस्वरूप इस युद्ध में मराठों की बुरी तरह हार हुई थी।  कहते है की इस युद्ध में मराठो के 70000 सैनिक मारे गए थे।  महादेव राव युद्ध में अपनी भाई की मृत्यु और मराठो की हार के लिए खुद को जिम्मेदार मानते थे।  जिसके कारण वो बहुत ज्यादा तनाव में रहते थे और इसी कारण गद्दी पर बैठने के कुछ दिनों बाद ही उनकी बिमारी से मृत्यु हो गई।

उनकी मृत्यु के पश्चात मात्र 16 साल की उम्र में नारायण राव पेशवा बने।  नाना साहेब के एक छोटे भाई रघुनाथ राव भी थे जिन्हे की सब राघोबा कहते थे। नारायण राव को पेशवा बनाने से काका (चाचा) राघोबा और काकी (चाची) अनादीबाई खुश नहीं थे। वो खुद पेशवा बनना चाहते थे उनको एक बालक का पेशवा बनना पसंद नहीं आ रहा था। दूसरी तरफ नारायण राव भी अपने काका को ख़ास पसंद नहीं करते थे क्योकि उन्हें लगता था की उनके काका ने एक बार उनके बड़े भाई महादेव राव की ह्त्या का प्रयास किया था।  इस तरह दोनों एक दूसरे को शक की नज़र से देखते थे।  हालात तब और भी विकट हो गए जब दोनों के सलाहकारों ने दोनों को एक दूसरे के विरुद्ध भड़काया। इसका परिणाम यह हुआ की नारायण राव ने अपने काका को घर में ही नज़रबंद करवा दिया।

इससे अनादि बाई और भी ज्यादा नाराज़ हो गई।  उधर राघोबा ने नारायण राव को काबू में करने का एक उपाय सोचा।  उनके साम्राज्य में ही भीलों का एक शिकारी कबीला रहता था जो की गार्दी (Gardi) कहलाते थे।  वो बहुत ही मारक लड़ाके थे। नारायण राव के साथ उनके सम्बन्ध खराब थे लेकिन राघोबा को वो पसंद करते थे।  इसी का फायदा उठाते हुए राघोबा ने उनके मुखिया सुमेर सिंह गार्दी को एक पत्र भेजा जिसमे उन्होंने लिखा 'नारायण राव ला धारा' जिसका मतलब था नारायण राव को बंदी बनाओ। लेकिन अनादि बाई को यहाँ एक खूबसूरत मौक़ा नज़र आया और उसने पत्र का एक अक्षर बदल दिया और कर दिया 'नारायण राव ला मारा'  जिसका मतलब था नारायण राव को मार दो।

पत्र मिलते ही गार्दियों के एक समूह ने रात को घात लगाकर महल पर हमला कर दिया। वो रास्ते की हर बाधा को हटाते हुए नारायण राव के कक्ष की और बढे। जब नारायण राव ने देखा की गार्दी हथियार लेकर खून बहाते हुए उसकी तरफ आ रहे है तो वो अपनी जान बचाने के लिए अपने काका के कक्ष की और "काका माला वचाव" (काका मुझे बचाओ) कहते हुए भागा।  लेकिन वह पहुँचने से पहले ही वो पकड़ा गया और उसके टुकड़े टुकड़े कर दिए गए।

यहाँ पर इतिहासकारो में थोड़ा सा मतभेद है कुछ उस बात का समर्थन करते है जो की हमने ऊपर लिखी जबकि कुछ का कहना है की नारायण राव अपने काका के सामने अपनी जान बचाने की गुहार करता रहा पर उसके काका ने कुछ नहीं किया और गार्दी ने राघोबा की आँखों के सामने उसके टुकड़े टुकड़े कर दिए। लाश के टुकड़ो को बर्तन में भरकर रात को ही महल से बाहर ले जाकर नदी में बहा दिया गया।

कहते है की किले में उसी बच्चे नारायण राव की आत्मा आज भी भटकती है और उसके द्वारा बोले गए आखिरी शब्द "काका माला वचाव" आज भी किले में सुनाई देते है।

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घोस्ट हंटिंग (भूतों का शिकार) और पैरानॉर्मल एक्टिविटीज कि रिसर्च में काम आने वाले उपकरण और गैजेट्स

भूत होते है या नहीं ये सदा से ही एक बहस का मुद्दा रहा है।  भूत - प्रेतों पर विश्वास और अविश्वास करने वाले इस बारे में अपने अपने तर्क देते है।  हम इन पर विश्वास करे या ना करे पर हर धर्म में  और हर सभ्यता में पारलौकिक ताकतों का वर्णन है। विशव के कई देशों में भूतों को पकड़ने और पारलौकिक ताकतों पर रिसर्च करने के लिए अनेक संस्थाए है।  हमारे भारत में भी ऐसे कई इंस्टिट्यूट है जिनमे से Team Pentacle एक है, जिसने हाल ही में गोवा के भुतिहा बंगलों में न सिर्फ पारलौकिक ताकतों को कैमरे में कैद किया बल्कि उनकी आवाज़े भी रिकॉर्ड कि। इस काम के लिए ये इंस्टिट्यूट अत्याधुनिक उपकरण और गैजेट काम में लेते है।  आज हम आपको कुछ ऐसे ही गैजेट्स के बारे में बता रहे है। हालांकि, ये पूरी तरह से सही साबित नहीं होते फिर भी किसी अजीबोगरीब हरकत का पता आसानी से लगाया जा सकता है।

EMF meter :-
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड्स का पता लगाने के लिए इस गैजेट का इस्तेमाल होता है। इस मीटर में कई नंबर दिखाई देते हैं। इन नंबरर्स के आधार पर ये तय किया जाता है कि आस-पास कोई पारलौकिक शक्ति है या नहीं।



नहीं होता पूरी तरह सही-
EMF मीटर के रिजल्ट को पूरी तरह से सही नहीं माना जा सकता है। किसी भी बिल्डिंग में मौजूद वाइरिंग, पावर सोर्स और बाकी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गैजेट्स के कारण EMF मीटर की रीडिंग बदल सकती है।
Thermal scanner :-
रिसर्च से ये पता चला है कि पारलौकिक शक्तियां जहां होती हैं वहां ठंड ज्यादा होती है। थर्मल स्कैनर किसी भी जगह के टेम्प्रेचर को रिकॉर्ड करने के लिए बनाया गया डिवाइस है। इस गैजेट को इंप्रारेड थर्मामीटर (IR मीटर  भी कहा जाता है।


कैसे करता है काम-
इस स्कैनर के द्वारा एक इंफ्रारेड बीम निकलती है। इस बीम की मदद से थोड़ी दूरी से भी किसी जगह के टेम्प्रेचर का पता लगाया जा सकता है। कुछ डुअर IR मीटर दूर की जगह और पास की जगह दोनों का टेम्प्रेचर रिकॉर्ड कर सकते हैं। इस गैजेट को भी पूरी तरह से सही नहीं कहा जा सकता है। हमेशा ठंडा इलाका होने से ये नहीं कहा जा सकता है कि वहां भूत हो।
Motion sensor :-
किसी ऐसी चीज को पकड़ना लगभग नामुमकिन है जिसे आप देख नहीं सकते हैं। इसलिए किसी भी अजीब मूवमेंट का पता लगाने के लिए मोशन डिटेक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। ये गैजेट्स होम सिक्युरिटी के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं।



कैसे करते हैं काम-
असल में मोशन सेंसर हीट सिग्नल का पता लगाते हैं। जब भी कोई चीज मोशन सेंसर की कवरेज फील्ड में आती है उसका पता लगाने के लिए मोशन सेंसर हीट सिग्नल्स का पता लगाते हैं। इन गैजेट्स में पहले से ही टेम्प्रेचर डिफाइन रहता है और जैसे ही कोई चीज निर्धारित टेम्प्रेचर के ऊपर जाती है मोशन सेंसर उसे रिकॉर्ड कर लेता है।
Spectrum Light Torch :-
अंधेरे में किसी भी चीज को देख पाना मुश्किल होता है। स्पेक्ट्रम लाइट एक अलग तरह की अल्ट्रा-वॉयलेट लाइट होती है जो कलर मैचिंग के लिए इस्तेमाल की जाती है। कई बार जानवरों और मछलियों के लिए इस लाइट को जू और एक्वेरियम में लगाया जाता है।



स्पेक्ट्रम लाइट टॉर्च को किसी भी कैमकॉडर, ट्राइपॉड या स्पेक्ट्रम कैमरे के साथ अटैच किया जा सकता है। इसमें अलग-अलग LED लाइट लगी होती हैं जो बहुत रौशनी पैदा करती हैं।
Digital recorder :-
कई बार लोगों का दावा होता है कि उन्होंने कोई अजीब आवाज सुनी है। ऐसे किसी भी दावे का पता लगाने के लिए एक डिजिटल रिकॉर्डर होना जरूरी है। डिजिटल रिकॉर्डर लो-पिच साउंड को भी रिकॉर्ड करता है। बैटरी से काम करने वाला यह गैजेट कई बार धीमी से धीमी आवाज भी ट्रैक कर लेता है।



कैसे करता है काम-
डिजिटल रिकॉर्डर में आवाज रिकॉर्ड होकर सीधे मेमोरी कार्ड में सेव हो जाती है। यह एनालॉग सिग्नल को पकड़ने के लिए बनाया गया गैजेट है। इसपर ऑडियो रिकॉर्डिंग का सैम्पल रेट 44.1 kHz होता है।
Air Ion Counter :-
यह उपकरण हवा में पॉज़िटिव और नेगेटिव आयन को नापने के काम आता है।  ऐसा माना जाता है कि जहाँ भूत या पारलौकिक शक्तिया होती है वहाँ बहुत अधिक पॉज़िटिव आयन्स होते है क्योकि भूत या पारलौकिक शक्तिया बहुत अधिक मात्रा में विधुत चुम्बकीय तरंगे डिस्चार्ज करती है


Barometer :-
बहुत से घोस्ट हंटर का मानना  है कि पैरानॉर्मल एक्टिविटीज वहाँ के बरोमेटिक प्रेशर को प्रभावित करती है। बैरोमीटर का प्रयोग किसी स्थान के बरोमेट्रिक प्रेशर में आये बदलाव का पता लगाने में किया जाता है।


Full Spectrum Camera :-
घोस्ट हंटिंग के लिए फुल स्पेक्ट्रम कैमरा सबसे उपयुक्त होता है क्योकि फुल स्पेक्ट्रम कैमरे उन चीज़ों कि भी तस्वीर उतार लेते है जिन्हे कि हम अपनी आँखों से नहीं देख पाते है।


इन के अलावा और भी कई उपकरण काम में लिए जाते है और सब उपकरणों से प्राप्त रिज़ल्ट का अध्यन करके किसी अंतिम निस्कर्ष पर पंहुचा जाता है।
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गोवा के वीरान बंगलों में,Team Pentacle द्वारा भूतों का इन्वेस्टीगेशन - खिची तस्वीरें, रिकॉर्ड कि आवाज़ें

भूत होते है या नहीं ये सदा से ही एक बहस का मुद्दा रहा है।  भूत - प्रेतों पर विश्वास और अविश्वास करने वाले इस बारे में अपने अपने तर्क देते है।  हम इन पर विश्वास करे या ना करे पर हर धर्म में  और हर सभ्यता में पारलौकिक ताकतों का वर्णन है। हाल ही में पारलौकिक शक्तियों कि इन्वेस्टीगेशन करने वाली संस्था Team Pentacle द्वारा गोवा में पूर्तगाली शासनकाल के समय के वीरान पड़े बंगलों में, अपने अत्याधुनिक उपकरणों के साथ पारलौकिक शक्तियों कि खोज कि गयी। अपनी इन्वेस्टिगेशन के दौरान टीम ने  न सिर्फ अदृश्य ताकत को कैमरे में कैद किया बल्कि उसकी आवाज भी रिकॉर्ड की है। गोवा में घोस्ट हंटिंग


                                      बंगले का दरवाजा और नीले घेरे में झांकती हुई औरत की छाया
गोवा की राजधानी पणजी से करीब एक-डेढ़ घंटे की दूरी पर एक गांव में स्थित ये 100 साल से ज्यादा पुराने बंगले वहां रहने वाले पुर्तगालियों द्वारा बनाए गए थे। ये बेहद खूबसूरत बंगले अब सुनसान पड़े हैं। वजह, जो भी इनमें रहने जाता है, उन्हें अदृश्य ताकतें परेशान करने लगती हैं और अंतत: उन्हें घर छोडऩा पड़ता है।
'टीम पेंटेकल' के प्रेसिडेंट शिशिर कुमार सदस्यों- रोहित शर्मा, निशा वर्मा, विवेक जैन और विवेक तलवार के साथ 28 फरवरी को किसी दूसरे पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेशन के तहत गोवा में थे। तभी वहां के ग्रामीणों ने उन्हें उक्त बंगलों के बारे में बताया।


एक ही समय में ली गई दो तस्वीरें। डीएसएलआर द्वारा ली गई तस्वीर में कुछ नहीं है जबकि दाहिनी ओर फुल स्पेक्ट्रम कैमरे से ली गई तस्वीर में कुछ अलग दिखाई दे रहा है। 
रांची में रहने वाले टीम पेंटेकल के प्रेसिडेंट शिशिर कुमार ने बंगले की जो तस्वीर उपलब्ध कराई है उसमें साफ-साफ खिड़की के पास झांकती हुई एक महिला दिखाई दे रही है, जो इन्वेस्टिगेशन के दौरान वहां मौजूद ही नहीं थी। यह तस्वीर फुल स्पेक्ट्रम कैमरे से ली गई है। यह खास किस्म का कैमरा होता है, जिसका इस्तेमाल साइंटिफिक रिसर्च में इंफ्रारेड, अल्ट्रावॉयलेट आदि किरणों को कैप्चर करने में किया जाता है।
शिशिर के मुताबिक, पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेशन में साधारण डीएसएलआर से अदृश्य शक्तियों की तस्वीरें (पैरानॉर्मल सिग्नीफिकेंट) नहीं ली जा सकतीं। साधारण कैमरे से ली गई बंगले की तस्वीर में सिर्फ वही दिख रहा है, जिसे खुली आंखों से देखा जा सकता है।


डीएसएलआर द्वारा उस जगह की ली गई क्लोज अप तस्वीर, जहां से महिला झांकती हुई दिखाई दी।  

शिशिर ने बताया, "बिल्डिंग के बाहर से इन्वेस्टिगेशन के दौरान हमने साधारण डीएसएलआर और फुल स्पेक्ट्रम कैमरे से कई तस्वीरें ली। साथ ही इवीपी (इलेट्रॉनिक वॉयस फेनोमिना) रिकॉर्डिंग भी की। बाद में साउंड और पिक्चर्स के एनालिसिस में हमने पाया कि फुल स्पेक्ट्रम तस्वीर में खिड़की के पास एक और झांकती हुई दिखाई पड़ रही है। देश में पहली बार पैरानॉर्मल एनर्जी का फुल बॉडी अपरेशन हमने कैच किया है। विदेशों में ऐसा पहले भी हो चुका है।"

शिशिर ने बताया कि अदृश्य शक्ति के लगभग स्पष्ट रूप में दिखाई देने को ही पैरानॉर्मल की भाषा में 'फुल बॉडी अपरेशन' कहा जाता है। तस्वीर में दिखने वाली औरत कौन है, क्या है, इस बारे में कुछ नहीं बताया।

'भूत' ने बजाया गिटार, कहा- 'शट अप' :-
ईवीपी रिकॉर्डिंग के विश्लेषण के दौरान कुछ पैरानार्मल आवाजें भी सामने आईं। शिशिर ने बताया, "पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेशन के दौरान हमने जब उस अदृश्य ताकत को नियमत: 'Make some noise' (मेक सम नॉयज) का इंस्ट्रक्शन दिया तो सामान्यत:: जैसा होता है, कोई आवाज नहीं आई। पर ईवीपी (इलेक्ट्रॉनिक वॉयस फेनोमिना) के विश्लेषण के दौरान हमने साफ-साफ गिटार की ट्यून सुनी।" उन्होंने आगे कहा, "इतना ही नहीं ईवीपी एनालिसिस के दौरान हमने बिल्कुल विदेशी आवाज में 'यू शट अप' भी सुना। ये आवाज तब की है जब हमारी टीम टीम बंगले से बाहर निकल रही थी।"

क्या होता है भूत-प्रेत ? :-
तो क्या इसका मतलब यह मान लिया जाय कि भूत प्रेत साइंटिफिकली प्रूव हो गए हैं? इस सीधे सवाल पर शिशिर का कहना है कि अब तक के रिसर्च में उन्होंने जो जानकारी हासिल की है उसके मुताबिक आम लोग जिसे भूत-प्रेत कहते हैं, वे वास्तव में 'एनर्जी पैकेट' होते हैं। ब्रह्मांड में फैली ऊर्जा अक्सर सुनसान जगहों में एक जगह जमा हो जाती है और असामान्य परिस्थितियां पैदा करती है।

हालांकि, वे इस बात का दावा नहीं करते कि उनकी बातें शत प्रतिशत सही हैं। उन्होंने कहा, "जिस तरह के भूत-प्रेत की लोग बात करते हैं, उससे हमारा सामना अब तक नहीं हुआ। ज्यादातर केसेस काल्पनिक अथवा सायकेट्रिक निकले हैं। एक पैरानॉर्मल इन्वेस्टीगेटर को जिस दिन सचमुच भूत मिल जाए, उसका मकसद पूरा हो जाए।"

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